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30 मार्च, 2020|4:36|IST

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मिथुन

29 मार्च 2020

आत्‍मविश्‍वास से परिपूर्ण रहेंगे। परिवार की जिम्‍मेदारी बढ़ सकती है। कार्यक्षेत्र में अनुकूल परिस्थितियां रहेंगी, परन्तु स्वभाव में चिड़चिड़ापन हो सकता है। किसी रुके हुए धन की प्राप्ति हो सकती है। जीवन साथी का साथ मिलेगा। मान-सम्‍मान की प्राप्‍ति होगी। (पं.राघवेंद्र शर्मा)

मिथुन

30 मार्च 2020

वाणी में कठोरता का प्रभाव बढ़ सकता है। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। पारिवारिक समस्याओं में कमी आएगी। आय वृद्धि के साधन विकसित होंगे। परिश्रम की अधिकता रहेगी। बातचीत में संतुलन बनाए रखें। परिवार के साथ किसी धार्मिक स्‍थान पर जाना हो सकता है। (पं.राघवेंद्र शर्मा)

मिथुन

31 मार्च 2020

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मिथुन

week14-2020

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मिथुन

1 मार्च 2020

मास के प्रारंभ में मानसिक शांति रहेगी। शैक्षिक कार्यों के सुखद परिणाम मिलेंगे। संतान की ओर से सुखद समाचार मिल सकते हैं। दस मार्च तक मन में नकारात्मकता का प्रभाव हो सकता है। 15 मार्च से कार्यक्षेत्र में परिश्रम में कमी आएगी। 23 मार्च के बाद सेहत के प्रति सतर्क रहें। वाहन चलाते समय सतर्क रहें। चिकित्सीय खर्च बढ़ सकते हैं। (पंडित राघवेंद्र शर्मा)

मिथुन

1 जन॰ 2020

मिथुन-(21 मई - 21 जून)।

वर्ष के प्रारम्भ में आत्मविश्वास से परिपूर्ण तो रहेगें,परन्तु धैर्यशीलता में कमी भी रहेगी। 25 जनवरी के बाद दाम्पत्य सुख में वृद्धि होगी। नौकरी में तरक्की के मार्ग प्रशस्त होंगे। आयु में वृद्धि होगी। विदेश प्रवास के योग भी बन रहे हैं, परन्तु शनि की ढैया प्रारम्भ होने से कार्यों में विघ्न आने से परेशानियां भी उठानी पड़ सकती है। संचित धन की हानि भी हो सकती है। 30 मार्च के बाद पिता को स्वास्थ्‍य विकार हो सकते हैं। पारिवारिक समस्याएं बढ़ सकती हैं। खर्च भी बढ़ेंगे। लेकिन धन की स्थिति में सुधार भी होगा। 12 मई से 30 सितम्बर के मध्य किसी पुराने मित्र से भी भेंट हो सकती है। परन्तु स्वास्थ्‍य के प्रति भी सचेत रहना होगा। उदर में वायु विकार हो सकते हैं। यात्रा के दौरान खान-पान के प्रति सचेत रहें। 24 सितम्बर के बाद से अनियोजित खर्च बढ़ेंगे। किसी मित्र से वैचारिक मतभेद भी बढ़ सकते हैं।

उपाय-

1:प्रत्येक मंगलवार के दिन शाम के समय लाल कपड़े में गुड़ बांधकर हनुमान जी के चरणों में चढ़ायें।

2:सरसों के तेल में अपना चेहरा देखें। शनिवार के दिन इसी तेल से सात पूड़े (गुलगुले) बनवा कर कुत्तों को खिलाऐं। बचे हुए तेल को अलग उठा कर रख लें। किसी और काम में प्रयोग न करें। हर शनिवार को यही तेल प्रयोग करना होगा।

3:‘शिरोरूपाय विदमहे अमृतेशाय धीमहि तन्नों राहूः प्रचोदयात्’ मन्त्र की नित्य एक माला जपें। (पं.राघवेन्द्र शर्मा)