22 फरवरी, 2020|7:14|IST

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लालू की जमानत के खिलाफ SC पहुंचा CBI, कोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब

उच्चतम न्यायालय ने चारा घोटाले से संबंधित एक मामले मे राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद को जमानत देने के झारखंड उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर शुक्रवार (14 फरवरी) को उन्हें नोटिस जारी किया। प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने केन्द्रीय जांच ब्यूरो की याचिका पर प्रसाद से जवाब मांगा है। जांच एजेन्सी ने उच्च न्यायालय के 12 जुलाई, 2019 के आदेश को चुनौती दी है। जांच एजेन्सी ने कहा है कि उच्च न्यायालय ने लालू यादव को दोषी ठहराने और उन्हें सजा देने के निचली अदालत के फैसले को निलंबित रखने और उनको जमानत पर रिहा करने का आदेश देकर त्रुटि की है।

उच्च न्यायालय ने देवघर कोषागार से 89.27 लाख रूपए की रकम धोखे से निकाले जाने के मामले में उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश देते हुए कहा था कि वह अपनी साढ़े तीन साल की सजा की आधी अवधि जेल में बिता चुके हैं। प्रसाद को झारखण्ड में चारा घोटाले से संबंधित चार मामलों में सजा हो चुकी है। ये मामले देवघर, दुमका और चाईबासा के कोषागार से छल से धन निकालने से संबंधित हैं। राजद सुप्रीमो को चाईबासा कोषागार से छल से धन निकालने के दो मामलों में सजा हो चुकी है। राजद सुप्रीमो को देवघर कोषागार मामले के अलावा चाईबासा के एक मामले में जमानत मिल चुकी है। लालू प्रसाद चारा घोटाले के पांचवें मामले में दोरंदा कोषागार से छल से धन निकालने के प्रकरण में भी मुकदमे का सामना कर रहे हैं। वह दिसंबर, 2017 से जेल में हैं।

जांच एजेन्सी ने अपनी अपील में कहा है कि जहां तक प्रसाद की सेहत का सवाल है तो यह सिर्फ अदालत को गुमराह करने का तरीका है। अपील में कहा गया है कि प्रतिवादी इतना अधिक बीमार होने का दावा कर रहा है कि वह जेल में नहीं रह सकता और उसे अस्पताल में रखने की जरूरत है। लेकिन अचानक ही वह पूरी तरह ठीक होने का दावा करते हुए इस आधार पर जमानत चाहते हैं कि उन्हें राजनीतिक दल राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष होने के नाते उन्हें अपनी पार्टी का मार्गदर्शन करने और 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी अध्यक्ष के रूप मे अपनी आवश्यक जिम्मेदारियां को निभाने की आवश्यकता हैं।

अपील के अनुसार प्रतिवादी प्रसाद को चारा घोटाले से संबंधित चार मामलों में कुल 31 साल अर्थात 372 महीने की सजा हुई है। मौजूदा मामले में उन्हें सात साल यानी 84 महीने की कैद की सजा हुई है और इसमे से सिर्फ 31 महीने ही जेल में रहे हैं। इसमे 11 महीने सजा सुनाए जाने से पहले और करीब तीन महीने दोषी ठहराये जाने के बाद की अवधि शामिल है। अपील में कहा गया है कि शेष 17 महीने वह मेडिकल आधार पर अस्पताल में रहे हैं।

क्या था मामला

बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद को देवघर कोषागार से अवैध निकासी के मामले में सीबीआई कोर्ट ने साढ़े तीन साल की सजा सुनाई है। इस मामले में वह डेढ़ साल से जेल में है। करीब आधी सजा वह काट चुके हैं। लालू प्रसाद ने इसी आधार पर जमानत देने के लिए याचिका दायर की थी। आधी सजा काटने पर सुप्रीम कोर्ट  और हाईकोर्ट ने कई दोषियों को जमानत दी है। इसी को आधार बनाते हुए लालू प्रसाद ने जमानत याचिका दायर की थी और जमानत पाई थी।

इसी मामले में सीबीआई की ओर से पहले ही एक याचिका दायर की गई थी। इसमें हाईकोर्ट से साढ़े तीन साल की सजा को बढ़ाने का आग्रह किया गया था। सीबीआई का कहना है कि लालू के साथ अन्य कई आरोपियों को पांच साल की सजा सुनायी गयी। लालू पर भी वही आरोप हैं। इस कारण उनकी सजा साढ़े तीन साल से बढ़ाकर पांच साल करनी चाहिए। 

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  • Web Title:Supreme Court issues notice to Lalu Prasad Yadav seeking a response from him on the appeal filed by the CBI challenging the bail granted to him