22 फरवरी, 2020|1:22|IST

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उमेश जाधव ने पुलवामा के शहीदों को दी सबसे सच्ची श्रद्धांजलि, 40 जवानों के घर जाकर मिट्टी को लगाया माथे पर

आज पुलवामा हमले की बरसी है। हर आम और खास देश पर जान न्योछावर करने वाले सीआरपीएफ के 40 शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दे रहा है। लेकिन, बेंगलुरु के निवासी उमेश गोपीनाथ जाधव के शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित करने के अनोखे तरीके के बारे में जानकर आपकी आंखें नम हो जाएंगी और आप उन्हें सलाम किए बिना नहीं रह पाएंगे।

पिछले सालभर में उमेश सभी 40 शहीद जवानों के घर गए और उनके गांव से मिट्टी इकट्ठा की। इसके लिए उन्होंने 61 हजार किलोमीटर की यात्रा की। यही वजह है कि श्रीनगर में सीआरपीएफ के लेथपोरा कैंप शहीदों के श्रद्धांजलि कार्यक्रम में आज उन्हें खास मेहमान के तौर पर बुलाया गया।

14 फरवरी को जयपुर से बेंगलुरु जा रहे थे उमेश गोपीनाथ जाधव

उनकी इस यात्रा के पीछे एक दिलचस्प कहानी है। अजमेर में एक म्यूजिक कंसर्ट के बाद पिछले साल 14 फरवरी को उमेश जाधव बेंगलुरु में अपने घर के लिए लौट रहे थे। जयपुर एयरपोर्ट पर टीवी स्क्रीन में यह न्यूज लगातार चलने लगी कि आत्मघाती हमलावर ने बस गाड़ी से सीआरपीएफ काफिले पर हमला कर दिया। जैसे ही वह विचलित कर देनेवाला दृश्य टीवी पर चलने लगा, उन्होंने यह फैसला किया कि शहीद परिवारों के लिए कुछ कुछ किया जाए।

61 हजार किलोमीटर की यात्रा रही चुनौतीपूर्ण

उमेश जाधव के लिए करीब 61 हजार किलोमीटर की यात्रा काफी चुनौतीपूर्ण रही और शहीदों के हर परिवार को ढूंढ़ना इतना आसान भी नहीं था। कई बार उनकी देशभक्त नारों से रंगी कार ही रात में उनके रहने का ठिकाना होती थी क्योंकि वे होटल का बिल चुकाने में असमर्थ थे। 

उन्होंने कहा- “हम शहीदों के परिवार वालों के साथ खाते और साथ ही रोते थे। मैंने यहां तक की अपना बर्थ डे 21 फरवरी को पंजाब के रोपड़ में जवानों के परिवारों के साथ मनाया।”

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जाधव ने कहा- मुझे गर्व है सभी शहीदों के घर गए

जाधव ने लेथपुरा कैम्प में संवाददाताओं से बात करते हुए कहा- “मुझे शहीदों के घरों से मिट्टी लेने के लिए न ही कोई डोनेशन मिला और न ही स्पोनशरशिप की गई थी। मेरा उद्देश्य हमले में शहीद जवानों को सम्मान और श्रद्धांजलि देना था। मैंने मिट्टी इकट्ठी करने के लिए 61 हजार किलोमीटर की यात्रा की। ये मिट्टी उनकी मातृभूमि की है।”

उन्होंने आगे कहा- “मुझे गर्व है कि मैंने पुलवामा हमले के सभी शहीदों के परिजनों से मुलाकात की और उनका आशीर्वाद लिया। पैरेंट्स ने अपने बेटे खोए, पत्नी ने अपने पति खोए, बच्चों ने पिता और दोस्तों ने अपने दोस्त खोए। मैंने मिट्टी उनके घर और श्मशान से उठाए।”

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  • Web Title:Umesh Gopinath Jadhav who collect soil from all Pulwama martyrs house and meet their family members