14 फरवरी, 2020|1:09|IST

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दुष्कर्म पीड़िता की पहचान उजागर करने के मामले में ट्विटर को चेतावनी, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

दिल्ली उच्च न्यायालय ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वह एक जनहित याचिका पर अपना जवाब दाखिल नहीं करती है तो उसे दस लाख रुपये का जुर्माना देना पड़ सकता है। जनहित याचिका में हैदराबाद दुष्कर्म पीड़िता का नाम सार्वजनिक करने पर मीडिया हाउसों एवं सोशल मीडिया मंच के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल एवं न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म से कहा कि एक हलफनामा दायर करिए, जिसमें यह विदित हो कि आप (ट्विटर) ऐसा दोबारा नहीं करेंगे। आप किसका इंतजार कर रहे हैं। अगर आप हलफनामा दायर नहीं कर रहे हैं तो हम जुर्माना लगाएंगे।

पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय इससे पहले इसी तरह के मामले में नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता के नाम का खुलासा करने को लेकर मीडिया हाउसों पर दस लाख रुपये का जुर्माना लगा चुका है। पीठ ने कहा कि हम इस आदेश को दोहराना नहीं चाहते हैं।

उच्च न्यायालय ने ट्विटर को हलफनामा दायर करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है और मामले की सुनवाई की अगली तारीख चार मई मुकर्रर की है। उच्च न्यायालय एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसे अधिवक्ता यशदीप चहल ने दायर किया है। भारतीय दंड संहिता की धारा 228 ए के तहत दुष्कर्म समेत कुछ निश्चित अपराधों में पीड़ित का परिचय उजागर करना दंडात्मक अपराध है और ऐसा करने पर कैद का प्रावधान है जो दो से तीन साल तक हो सकती है। 

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  • Web Title:Delhi High Court Warn Twitter Reveal Minor Rape Victim Identity